फेडरेशन ऑफ़ वेटरन्स एसोसिएशन: पूर्व सैनिकों की मांगों की पुनरावृत्ति की कहानी
आपदा, साहस, और देशभक्ति की कहानी
भारतीय सेना, जिसकी विश्व में अपनी शौर्यगाथाएं सुनाई जाती हैं, जब भी संघर्ष की बात आती है, तो उसके पूर्व सैनिकों की अहम भूमिका को हमेशा याद रखी जाती है। ये वीर सैनिक देश के लिए अपना जीवन ख़तरे में डालते हैं और उनकी सेवाएं उन्हें सम्मान और प्रेम के साथ भर देती हैं।
ज्ञापन का पहला अध्याय: मांगों की सुरक्षा
यही सैनिक जब सेवानिर्वित हो गये हैं, तो विभिन्न समस्याओं का समाधान और पूर्व सैनिकों की मांगों की सुरक्षा के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा देशवासियों को जागरूक जागरूक कर रहे हैं। इस संदर्भ में, देशभर की पूर्व सैनिकों की 175 से भी ज़्यादा संस्थाओं ने अपने समर्थन से 9th April 2023 को Federation of Veterans’ Association का गठन किया और कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जो पूर्व सैनिकों की मांगों को समर्थन प्रदान करने एवं सरकार के कानों तक इन सड़क पर पिछले एक साल से खड़े पूर्व सैनिकों की आवाज़ पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
एक यात्रा जो 20 फरवरी 2023 से शुरू हुई
पूर्व सैनिकों की मांगों का सुरक्षित होना बहुत आवश्यक है, और इसके लिए 20 फरवरी 2023 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक धरना आरंभ हुआ। यह धरना देशभर के पूर्व सैनिकों और वीर-नारियों को एक स्थान पर ला कर उनकी आवाज को सुनने के सक्षम बने इसलिए 9th अप्रैल 2023 में Federation of Veterans’ Association ने धरने को एक मंच प्रदान किया।
मांगों का ज्ञापन:
इसी कड़ी में 03 अप्रैल 2023 को देश के सभी जिलाधिकारियों के माध्यम से मान्यवर आपको ज्ञापन भेजा गया! सुनवाई न होने पर पुनः 30 अप्रैल 2023 को अपने अपने जन प्रतिनिधियों के माध्यम से दोबारा मान्यवर आपको ज्ञापन सौंपा गया। परंतु किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया न मिलने के कारण तीसरी बार मान्यवर आपको 30 मई 2023 को सम्पूर्ण देश के एस.डी.एम. और तहसीलदारों के माध्यम से मान्यवर आपको ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन का दूसरा अध्याय: धरना से हड़ताल तक का सफर
जब युद्ध-विधवाओं, दिव्यांग एवं पूर्व-सैनिकों की मांगों पर सरकार द्वारा किसी भी स्तर पर संज्ञान नहीं लिया गया, तब सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए 2 जुलाई 2023 को सम्पूर्ण भारत में सभी जिलाधीश कार्यालयों पर पूर्व सैनिकों द्वारा एक दिन की भूख हड़ताल का आयोजन किया गया। यह एक शक्तिशाली संदेश था जिससे सरकार को यह बोध होना चाहिए था कि ये मांगें गंभीर हैं और इन्हें ध्यान में लेना आवश्यक है।
गहरे विचार: समस्याओं की निवारण की कड़ी में
परंतु इस प्रयास से भी पूर्व सैनिकों की मांगों पर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया, जिससे निराश व आक्रोशित होकर 23 जुलाई 2023 को लाखों की संख्या में देश के कोने-कोने से दिव्यांग पूर्व-सैनिकों, युद्ध-विधवाओं और पूर्व-सैनिकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर पाँचवीं बार अपना रोष व्यक्त किया, ताकि सरकार का ध्यान 20 जुलाई 2023 से सदन में चल रहे मानसून सत्र के दौरान पूर्व सैनिकों की विसंगतियों पर चल रहे धरने पर आकर्षित हो|
समस्याओं को सुलझाने का प्रयास
संघर्ष के बावजूद, Federation of Veterans’ Association ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार के साथ दूरस्थ मंथन का प्रयास किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ये समस्याएं गंभीर हैं और उनका त्वरित समाधान किया जाना चाहिए। इस कड़ी में Federation of Veterans’ Association Defence Minister Shri Rajnath Singh जी से भी मिली और डेढ़ घंटे से भी ज़्यादा चली बातचीत में उन्हें सारे तथ्य खोलकर समझाने में भी कामियाब हुई कि विसंगतियों हैं, हैं और भर भर कर हैं।किंतु तीन महीने गुज़र गए और दुनिया भर में चुनाव प्रचार घूँझ सकता है किन्तु ये शांत बैठे सैनिकों की आवाज़ एक कार्यालय में दबी की दबी रह गई।
यह आस्था का कार्य है
इस पूरे संघर्ष में, Federation of Veterans’ Association ने एक ऐसा मंच बनाया है जो पूर्व सैनिकों की मांगों को सुनने और समझने का साधन है। उनका संघर्ष एक नेतृत्व में, अधिकारिता में, और दृढ़ संकल्प में व्यक्त हो रहा है। यह समर्थन और साहस का सबूत है और पूर्वसैनिकों को उनका हक मिलना चाहिए, और उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए। और जब तक नहीं सुना जाएगा ये आवाज़ बढ़ती रहेगी और निःसंकोच सरकार को इसे सुनना पड़ेगा।